जांजगीर-चांपा. नगरपालिका क्षेत्र अंतर्गत निकलने वाले कचरे का सौ फीसदी निपटारा पालिका प्रशासन नहीं करा पा रहा। जबकि शहर से निकलने वाले गीले और सूखे कचरे को एसएलआरएम सेंटर में छांटकर गीले कचरे से खाद और सूखे कचरे को बेचना है, लेकिन वर्तमान में 60 फीसदी कचरे का निपटारा हो रहा है जबकि 40 फीसदी कचरा शांतिनगर के किनारे खुले में डंप हो रहा है। जिससे कारण आसपास रहने वाले लोगों को राहगीरों को दुर्गंध के चलते लोगों को यहां से गुजरना मुश्किल होता है।

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दूसरी ओर खुले में कचरा डंप होने से आए दिन असमाजिक तत्वों द्वारा यहां आग लगा दी जाती है। प्लास्टिक, टायर समेत अन्य सामान होने से जहरीला धुआं निकलता है। जिससे पर्यावरण को भी नुकसान होता है। उल्लेखनीय है कि ग्रीन टिब्यूनल के आदेश है कि निकाय क्षेत्र में जितना भी कचरा निकल रहा है उसका सौ फीसदी तक निराकरण होना चाहिए। दूसरा खुले में आग लगाने पर भी प्रतिबंध है क्योंकि इससे निकलने वाला धुआं पर्यावरण के लिए सुरक्षित नहीं है। यह स्थिति तब है कि मिशन क्लीन सिटी के नाम पर शासन लाखों खर्च कर रही है।

- महिला समूहों को कचरे का एसएलआरएम सेंटर में ले जाकर पूरी तरह निपटारा करने निर्देशित किया गया है। इसके लिए पूरा प्रयास किया जा रहा है। सभी एसएलआरएम तैयार हो जाने के बाद पूरी तरह निपटारा होगा। इसके लिए पूरा प्रयास कर रहे हैं - पीएन पटनायक सीएमओ जांजगीर-नैला



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