जांजगीर-चांपा। नाम गोपाल प्रसाद। उम्र ६५। काम दर्जी का। जेल में बंदियों के चाहे जितने भी कपड़े हों चंद समय में सिलाई कर देते हैं। बीते १५ महीने से यह काम करते आ रहे हैं। उनके इस कार्य से जेल में निरूद्ध २५० बंदी कायल हैं। कपड़े चाहे नए हो या पुराने, वह चंद घंटे में ही सिलकर बंदियों को प्रदान कर देते हैं।
जेल में निरूद्ध उदयबंद निवासी गोपाल प्रसाद की कहानी सबसे जुदा है। समय का फेर कहें या किस्मत का मारा बीते १५ महीने से एक गंभीर अपराध में गोपाल प्रसाद जांजगीर के जिला जेल में निरूद्ध है। उसका पुस्तैनी दर्जी का पेशा जेल के बंदियों के लिए बेहद काम आ रहा है। बंदियों के फटे पुराने कपड़े हों या नया कपड़ा वह दिन भर सिलाई कर अपने गमों को भुला देता है। उसके पास कपड़ों का अंबार लगा रहता है। उसके पास चाहे जितना भी कपड़ा हो वह आसानी से सिलकर दे देता है। गोपाल प्रसाद ने बताया कि वह गांव में यह कार्य काफी दिनों से करते आ रहा है। किसी कारणवश वह गंभीर अपराध में फंस गया, जिसके चलते उसे जेल की हवा खानी पड़ गई।
नि:शुल्क काम करता है गोपाल
गोपाल प्रसाद ने बताया कि वह दर्जी का काम नि:शुल्क करता है। इसके एवज में उसे सेवा शुल्क के नाम पर कुछ भी नहीं मिलता। उसका कहना है कि उसे कुछ चाहिए भी नहीं, क्योंकि नि:शुल्क सेवा करने में जो खुशी की अनुभूति होती है वह किसी काम में नहीं मिलता। उसका कहना है कि उसे बस लोगों का आशीर्वाद बस मिले।
कट जाता समय
६५ साल के उम्र में वह तकरीबन आठ घंटे फूर्ती से काम करता है। उसे न तो चश्में की जरूरत पड़ती है और न ही कोई अन्य संसाधन। अमूमन देखने को मिलता है कि इस उम्र में लोगों को सुई में धागा पिरोने में तकलीफ होती है क्योंकि इस उम्र्र में आंख कमजोर हो जाती है, लेकिन गोपाल प्रसाद को चश्में की भी जरूरत नहीं पड़ती।
वर्जन
गोपाल प्रसाद जेल के बंदियों के सारे फटे पुराने कपड़ों की सिलाई फूर्ती से करता है। उसके इस काम की सभी लोग प्रशंसा करते हैं।
-एआर कुंजाम, जेलर जिला जेल जांजगीर
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