जांजगीर-चाम्पा. क्षेत्र के समितियों में करोड़ो का धान बारिश में भीग गया। उपार्जन केंद्र प्रभारियों के पास धान को ढंकने के लिए माकूल इंतजाम नहीं होने से शासन को बेहद नुकसान उठाना पड़ रहा है। आसपास के गांव लोहर्सी, मेउ, रसौटा, पकरिया झूलन सहित एक दर्जन समितियों में धान लावारिश स्थिति में पड़ी रही। समिति प्रभारी धान को ढकने के लिए रुचि नहीं दिखाई दी। यदि थोड़ी और बारिश होती तो धान में अंकुरण आना तय था।
बीते तीन दिनों से लगातार बारिश होती रही। सोमवार को मौसम साफ हुआ। बारिश के कारण सबसे अधिक नुकसान समितियों में हुआ। क्योंकि उपार्जन केंद्र प्रभारियों ने धान की खरीदी तो कर ली, लेकिन उसे ढंकने के लिए तालपतरी सहित अन्य व्यवस्था नहीं कर पाए थे। पामगढ़ क्षेत्र के लोहर्सी, मेउ, पकरिया झूलन सहित आसपास के एक दर्जन समितियों में बदहाली चरम पर था। जहां बारिश से करोड़ो के धान भीग गए। जबकि मौसम के मिजाज को देखते हुए समिति प्रभारियों को पहले से तालपतरी की व्यवस्था करने को कहा गया था। इसके बाद भी समिति प्रभारियों ने बेहद लापरवाही बरती है। जिसका खामियाजा सरकार को भुगतना पड़ेगा। सबसे अधिक कदतर स्थिति लोहर्सी खरीदी केंद्र में देखने को मिली। यहां के समिति प्रभारी ने धान को सुरक्षित रखने में बड़ी कोताही बरती है। उन्होंने हजारों क्ंिवटल धान की खरीदी तो कर लिया, लेकिन व्यवस्था बना पाने नाकाम रहे। इस आशय की शिकायत पामगढ़ एसडीएम से की गई थी। एसडीएम सागर सिंह राज ने मामले की जांच करने का आश्वासन ग्रामीणों को दिया है।

आखिर कहां जाती है खर्च की राशि
गौरतलब है कि समिति में धान खरीदी के वक्त सारी सुविधाओं के लिए सरकार समिति प्रभारियों को खर्च देती है। हमाली, सुतली, तालपतरी सहित अन्य खरीदी के लिए चाहे जितनी भी राशि हो उसका बाकायदा बिल बनाया जाता है। जिसे समिति प्रभारी अपनी जेब में भर लेते हैं। वहीं सरकार का धान भगवान भरोसे रह जाता है।



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