जांजगीर-चांपा. जिला मुख्यालय के सौंदर्यीकरण की योजना साल भर बाद भी मूर्त रूप नहीं ले सकी है। अभी भी ५० फीसदी काम अधर में है। कहीं टाइल्स नहीं लगा है तो कहीं बिजली फिटिंग नहीं हो पाई है। इसके अलावा सौंदर्यीकरण की दिशा में जो काम होना था उसमें भी कटौती की जा रही है। इसके चलते शहरवासियों का सपना सालों बाद भी पूरा नहीं हो पा रहा है। सबसे अहम बात यह है कि तालाब में साफ पानी भरने की दिशा में कोई कदम नहीं उठाया जा रहा है। जिसके चलते शहर के लोगों में नाराजगी देखी जा रही है।
गौरतलब है कि शहर का सबसे चर्चित भीमा तालाब की सौंदर्यीकरण योजना सालों बाद भी मूर्त रूप नहीं ले पा रही है। शहर के बीच सौंदर्यीकरण के लिए भीमा तालाब में दो साल पहले तत्कालीन कलेक्टर डॉ. भारतीदासन ने नींव रखी थी। योजना के तहत तकरीबन साढ़े छह करोड़ की लागत से भीमा तालाब का सौंदर्यीकरण किया जाना है। तालाब के चारों ओर पिचिंग के साथ साथ चौपाटी की तरह रूप देना है।
फूल से सुसज्जित गांर्डन का रूप देना है। वहीं तालाब के चारों ओर लाइटनिंग की भी व्यवस्था करनी है। ताकि शहर के लोगों के लिए यह तालाब मील का पत्थर साबित हो, लेकिन दो साल बीत जाने के बाद भी सौंदर्यीकरण का काम आधी भी नहीं हो पाई है। इसके चलते शहर के लोगों में नाराजगी देखी जा रही है। इसके पीछे नगरपालिका के जिम्मेदार अधिकारियों की कार्यकुशलता का अभाव माना जा रहा है। ठेकेदार इतनी मंथर गति से काम कर रहा है कि काम की रफ्तार को देखकर कछुआ भी शर्मा जा रहा है।
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पहले भी हो चुके लाखों खर्च
भीमा तालाब के सौंदर्यीकरण के लिए बीते एक दशक से खर्च के उपर खर्च किया जा रहा है। एक दशक पहले भी भीमा तालाब के सौंदर्यीकरण के लिए पांच से दस लाख रुपए खर्च किया जा चुका है। इसके बाद भी तालाब में सौंदर्यीकरण के नाम पर कुछ भी दिखाई नहीं दे रहा है। तालाब के पार को पाटकर कितना भी विकास कार्य किया गया वह मिट्टी में मिल चुका है।
तालाब का पानी सबसे अहम मुद्दा
शहर सहित पुरानी बस्ती के लोगों का कहना है कि जितना खर्च सौंदर्यीकरण के नाम से किया जा रहा है उससे अधिक तालाब के पानी के नाम से भी किया जाना चाहिए। क्योंकि तालाब के पानी से तकरीबन ५ हजार लोग निस्तारी करते हैं। जब तालाब का पानी ही साफ नहीं रहेगा तो तालाब की उपयोगिता किस काम की होगी। लोग पर्यटक के रूप में यहां जरूर पहुंचेंगे पर जब निस्तारी की बात आएगी तो लोग गंदे पानी में निस्तारी नहीं कर सकते। गौरतलब है भीमा तालाब का पानी बेहद गंदा है। पानी की सफाई की दिशा में ठोस पहल नहीं किए जाने से लोगों में रोष व्याप्त है।
नहर के पानी से तालाब भरने की योजना भी फेल
शहर के भीमा तालाब में साफ पानी भरने के लिए दो साल पहले नहर से पानी लाने की योजना बनाई गई है। नहर से तालाब तक नाली निर्माण किया जा रहा है, लेकिन नाली निर्माण का कार्य भी मंथर गति से किया जा रहा है। नहर से तालाब तक नाली निर्माण का कार्य आठ महीने में आधी भी नहीं बन पाई है। इससे साफ जाहिर होता है कि इस कार्य में भी ठेकेदार द्वारा लापरवाही बरती जा रही है।
-भीमा तालाब के सौंदर्यीकरण के लिए ठेकेदार को दिसंबर तक काम पूरा करने कहा गया है। लगभग ७५ फीसदी काम हो चुका है। काम में तेजी लाने ठेकेदार को कहा जाएगा- सुशील शर्मा, सीएमओ, जांजगीर-नैला
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