एक समय था जब छत्तीसगढ़ के पारंपरिक वाद्ययंत्र लुप्त होने के कगार पर थे. उनका अस्तित्व खतरे में था. तब बिलासपुर के रहने वाले अनुप रंजन पांडेय ने इन्हे बचाने का बीड़ा उठाया.

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