जांजगीर-चांपा. मई में ही लोग गर्मी से परेशान हैं। ऐसा नहीं है कि पहली बार इतनी गर्मी पड़ रही है। ऐसा नहीं है कि पहली बार तापमान इतना अधिक स्तर तक पहुंच रहा है। फिर भी लोग गर्मी से परेशान हैं। ऐसा क्यों हो रहा है। दरअसल इसका सबसे बड़ा कारण है पेड़ों की लगातार कम होती संख्या और बढ़ते कांक्रीट के जंगल के कारण। यह कारण कितना बड़ा है, इसको आपको खुद महसूस करना होगा। पत्रिका ने इसकी पड़ताल की, जिसमें आपको पता चलेगा कि यह गर्मी किस कदर हम लोगों पर हावी होती जा रही है।
वैज्ञानिकों की मानें तो पहले हमारे चारों ओर हरियाली होती थी, जो सूरज से आने वाली गर्मी को संतुलित कर लेती थी। पेड़ हमें ऑक्सीजन देते थे, ठंडक का अहसास दिलाते थे। पहले जांजगीर के चारों तरफ चांपा रोड, बनारी रोड, नैला रोड और केरा रोड पर विशालकाय वृक्ष हुआ करते थे। सड़क पर निकलने पर जून महीने की भीषण गर्मी में भी शीतलता का अहसास होता था। लोग पेड़ों की छाया में बैठकर सुस्ता भी लिया करते थे, लेकिन आज ये दरख्त विकास की भेंट चढ़ चुके हैं। इन रास्तों में कोई ऐसा पेड़ नहीं मिलेगा, जहां पर बैठकर आप सुस्ता सकें। अगर कार से निकले और एसी न चल रहा हो तो कार के अंदर भट्टी जैसी हालत रोज होगी। असहनीय धुप और आठ किमी प्रति घंटा की रफ्तार से चल रही पश्चिमी हवा के कारण रविवार दोपहर लोग गर्मी से बेहाल रहे। पेड़, स्त्रोत, विहीन और कांक्रीट से निर्मित मुख्य शहर का तापमान हरियाली वाले क्षेत्रों की तुलना में साढ़े तीन डिग्री अधिक ४५.५ डिग्री सेल्सियम रिकार्ड किया गया। शहर के पांच क्षेत्रों में पारे की पड़ताल की तो पता चला कि मौसम विभाग केन्द्र से रिकार्ड बताए गए। शहर के लोग उससे कहीं अधिक गर्मी से उबल रहे हैं।
पेड़ कटाई के बाद लगाने नहीं लेते रूचि
शहर में विकास के नाम पर सड़क चौड़ीकरण, भवन निर्माण सहित अन्य वजह से लगातार पेड़ो की कटाई की जा रही है। जांजगीर में ही अभी तीन से चार साल पहले सड़क किनारे बीटीआई चौक से नेताजी चौक, नेताजी चौक से स्टेशन रोड तक १०० से अधिक पेड़ थे। वर्तमान में सभी पेड़ो की कटाई हो चुकी है। उसके स्थान पर एक भी पेड़ आज तक लगाए गए हैं।
रात का पारा उछला
पिछले पांच दिनों में रात का तापमान ६ डिग्री बढ़ा है। रविवार को न्यूनतम तापमान सामान्य से ४ डिग्री अधिक ३१.४ डिग्री सेल्सियम रिकार्ड किया गया। चार दिन पहले २२ मई को न्यूनतम तापमान २४.७ डिग्री सेल्सियम था। सुबह की आद्रता ३३ और शाम की आद्रता २७ प्रतिशत रही।
पेड़ लगाएं, पड़ोसी जिला से ले सबक
पड़ोसी जिला कोरबा में पेड़ों की कतारों से जांजगीर वासियों को सीख लेनी चाहिए। हर चौराहे, सड़क पर आपको पेड़ों की कतार मिल जाएंगी। लेकिन आपको जांजगीर में ऐसा पेड़ की कतार नहीं नहीं मिलेगी। कोरबा जिला में मड़वारानी प्रवेश करते ही ठंडक का अहसास कराते हैं। स्थानीय प्रशासन व जनप्रतिनधियों सड़कों के किनारे ऐसे पेड़ लगवा हैं कि वे चारों तरफ बढ़ते हैं और सड़क को ज्यादातर कवर कर लेते हैं। जबकि हमारे जांजगीर में ऐसे पेड़ों की कतार कहीं देखने को नहीं मिलेगी। जो ठंडक का अहसास करा सके। पेड़ ऐसे लगाने चाहिए, जो मोटी पत्तियों वाले हों ताकि ज्यादा से ज्यादा ऑक्सीजन और छाया मिल सके।
वर्जन
वर्तमान में ज्यादातर ग्रामीण इलाकों में पेड़ो की कटाई नहीं होती है। इसलिए यहां हरियाली रहती है। जिससे कम गर्मी पड़ती है। शहर में लगातार पेड़ों की कटाई से हरियाली गायब की वजह से गर्मी बढ़ रही है।
एचपी चंद्रा, मौसम वैज्ञानिक रायपुर
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