जांजगीर-चांपा. किसी भी व्यक्ति के जीवन में शिक्षा का बहुत अधिक महत्व होता है। वहीं आजकल के पालक इस बात पर काफी जागरूक भी नजर आते है कि उन्हें अपने बच्चों को एक बेहतरीन शिक्षा देकर उनका जीवन अच्छा बनाना है। जिसके चलते शहरों में बड़े-बड़े स्कूल और कोचिंग सेंटर भी खोले जा रहे है। लेकिन शहर समेत जिले कोचिंग सेंटर संचालन के लिए मापदंड तय नहीं होने से गली और मोहल्लों में कोचिंग सेंटरों का मनमाना ढंग से संचालन हो रहा है। कोई गाइड लाइन नहीं होने से संचालित कई कोचिंग सेंटरों छात्र की आवाजाही वाहनों से रास्ते पर जाम की स्थिति बनी रहती है। साथ ही कोंचिंग संस्थानों में सुरक्षा के इंतजार नहीं होने से छात्र-छात्राएं भी असुरक्षित है।
सूरत के कोचिंग संस्थान में शुक्रवार को हुए हादसे ने कोचिंग संस्थाओं के भवनों में सुरक्षा व्यवस्था की पोल खोल दी। जांजगीर में भी एक दर्जन से अधिक कोचिंग संस्थान संचालित है। लेकिन यहां संचालित अधिकांश कोचिंग संस्थाओं में भी हादसों से निपटने के कोई बंदोस्त नहीं है। पत्रिका ने शहर में चल रहे कोचिंग संस्थाओं का जायजा लिया। यहां ज्यादातर कोचिंग संस्थान तंग गलियों में है। अधिकांश में सुरक्षा के कोई इंतजार नहीं है। खासकर आग के बचाव के लिए संस्थाओं में कोई उपाय नहीं किए गए। सबसे बड़ी बात यह है कि शहर के किसी भी संस्थान में कोई तरह की व्यवस्था नहीं की गई। न ही पार्किंग न ही कोई आपात गेट है। एकमात्र गेट लगा हुआ है। जिससे आना जाना करना पड़ता है। लिंक रोड, न्यू चंदनिया पारा वार्ड ७, नहर पुल के पास, चांपा रोड, भाठापारा रोड समेत कई जगहों पर चल रहे इन कोचिंग संस्थानों में रोजाना अलग-अलग पारियों में सैकड़ों बच्चे पढऩे आते है। कोई पहली तो कोई दुमंजिला भवन में संचालित है।
बिजली के तार से हो सकती है स्पार्किंग
यहां कोचिंग संस्थान कई घरों पर चल रहे तो कहीं नए भवन बनाकर कोचिंग संस्थान चलाई जा रही है। बावजूद सुरक्षा व्यवस्था को लेकर कोई गंभीर नहीं है। चंदनिया पारा में संचालित कोचिंग सेंटर से लगे विद्युत के खंभा में बिजली के तारो का जाल भवन तक फैला हुआ है। जो कभी भी स्पार्किंग होने से आग लगने का रहता है। लेकिन इन अधिकांश भवनामें सीज फायर सिस्टम नियम कायदों की पालन किए बिना संचालित किया जा रहा है।
प्रशासन व नपा ने भी कभी सुध नहीं ली
प्रशासन ने भी कभी इन अवैध रूप से संचालित कोचिंग सेंटरों की सुध नहीं ली है। पालिका के पास शहर में कितने कोचिंग सेंटर संचालित है इसकी जानकारी नहीं है। जबकि हरेक कोचिंग सेंटर वालों को नपा में बकायदा पंजीयन कराना होता है। लेकिन शहर में चल रहे अधिकांश कोचिंग सेंटर इसका पालन नहीं कर रहे है। इस न तो प्रशासन का अंकुश है और न ही जिम्मेदा नगरपालिका है।
कोचिंग सेंटर में यह व्यवस्था जरूरी
कोचिंग संस्थान के भवन का क्षेत्रफल कम से कम ३०० वर्ग मीटर होना आवश्यक है। संस्थान के बाहर न्यूनतम ४० फीट का मार्ग होना चाहिए। कोचिंग आने वाले अभ्यर्थियों पालक के वाहनों के लिए निर्धारित पार्किंग, शिक्षक के लिए प्रयुक्त प्रत्येक कक्ष में आने जाने का पृथक द्वार जरूरी है। प्रत्येक तल पर प्रवेश निकास के लिए दो सीढिय़ों होना अनिवार्य है। कोचिंग संस्थान में छात्र-छात्राओं के लिए अलग से शौचालय होना चाहिए। अग्निशमन संबंधी समस्त प्रावधानों की पालन करना सुनिश्चित करनी जरूरी है।
सुरक्षा के ये 14 मानक जरूरी
० प्रवेश के उचित साधन हो
० भूमिगत टैक व जल टंकियां हो
० स्वचलित छिड़काव प्रणाली हो
० चर्खी से लिपटा पाइप
० अधिकृत अग्निशमन यंत्र हो
० प्रापर अलार्म सिस्टम की मौजूदगी
० सार्वजनिक संबोधन व्यवस्था हो
० उचित निकासी मार्ग
० बिजली के वैकल्पिक बंदोबस्त हो
० फायरमैन स्वीच हो
० परिसर में प्रॉपर संकेतक लगे हो
० वेट राइजर डाउन कमर सिस्टम मौजूद हो
(अग्नि सुरक्षा अधिनियम १९८७)
दमकल छोड़ो, टैंकर तक नहीं पहुंच सकता
ज्यादातर संस्थान ऐसी तंग गलियों में है, जहां राहत संसाधनों का मौके तक पहुंचना टेढी खीर है। फायर सेफ्टी एक्ट के मुताबिक शहरी क्षेत्र में आग की सूचना मिलने के पांच मिनट के भीतर दमकल को घटना स्थल पर पहुंचना होता है, लेकिन यहां हालात ऐसे कि तंग गलियों में संचालित इन भवनों तक दमकल तो दूर पानी के टैंकर तक नहीं पहुंच सकता।
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